अध्याय 30 नाउ दैट वाज़ मी पुशिंग यू

पाउला पूरी तरह अपने ही नाटक में डूबी हुई थी। वह किरदार से बाहर ही नहीं आ पा रही थी, क्योंकि वह जी-जान से सोफिया को यह साबित करने में लगी थी कि ज़ैकरी की ज़िंदगी में उसकी कितनी अहमियत है।

लेकिन अफसोस, उसका इकलौता दर्शक इस तमाशे में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं ले रहा था।

सोफिया यह सब देखते-देखते ऊबकर उनीं...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें